चंद्रावली: राधा की प्रिय सखी और कृष्ण की आस्था की प्रतीक

चंद्रावली श्रीराधा की सबसे प्रिय सखियों में से एक मानी जाती हैं। पुराणों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वे नवल-नारायण के भक्ति-संबंध की एक गहरी झलक प्रस्तुत करती हैं। कहा जाता है कि चंद्रावली को भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल आने की बात सुनकर उन्हें देखने की तीव्र इच्छा हुई। वे राधा रानी के साथ श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए गोकुल आने की जिद करने लगीं।

श्रीकृष्ण, जो राधा और उनकी सखियों के प्रति सदैव समर्पित थे, चंद्रावली की भावनाओं को देखकर उन्हें गोकुल लाने के लिए स्वयं आए। गोकुल से महज 3 किलोमीटर दूर, चंदा थक गईं और भगवान से कहा कि वे यहीं रुकना चाहती हैं। तब श्रीकृष्ण ने उनकी इच्छा के अनुरूप उस स्थान को पवित्र बना दिया। इसी स्थान पर आज माता चंद्रावली मंदिर स्थित है, जो भक्तों के बीच विशेष आस्था का केंद्र है।

चंद्रावली की कथा सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि भक्ति, सखी-भाव और श्रद्धा का प्रतीक है

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