रुक्मणी की मृत्यु: एक दायाद की अंतिम यात्रा
भगवान श्रीकृष्ण के स्वर्गवास के बाद द्वारिका में शोक का माहौल छा गया। जब अर्जुन वहाँ पहुँचे, तो सबकुछ उजड़ा हुआ देखकर उनका हृदय द्रवित हो गया। यदुवंश के अधिकांश सदस्यों के शव पहचानकर उन्होंने अंतिम संस्कार किया।
रुक्मणी की मृत्यु तब हुई, जब उन्होंने अपने प्रभु श्रीकृष्ण के जाने का समाचार सुना। भक्ति और समर्पण की अग्नि में जलकर उन्होंने शरीर त्याग दिया। यह कोई साधारण मृत्यु नहीं थी, बल्कि आत्मा का अपने प्रियतम के प्रति अंतिम समर्पण था।
जांबवती ने भी ऐसे ही देह छोड़ी, क्योंकि उनका जीवन भी श्रीकृष्ण के साथ ही जुड़ा था। वह सिर्फ जीवन-साथी नहीं, अपितु उनकी आस्था की प्रतीक थीं। बलराम जी की पत्नी रेवती ने भी उसी क्षण देह त्याग कर दिया, मानो संपूर्ण यदुकुल की महान आत्माएँ एक साथ ही इस संसार से विदा हो गई हों।
ये घटनाएँ महाभारत और पुराणों में वर्णित हैं। रुक्मणी की मृत्यु न केवल एक ऐतिहास
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