रुक्मिणी और कृष्ण का प्रेम और विवाह

रुक्मिणी और कृष्ण के विवाह की कथा भक्ति, प्रेम और साहस की एक अनमोल गाथा है। रुक्मिणी, विदर्भ की प्रिय राजकुमारी, श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबी हुई थीं। उन्होंने कभी कृष्ण को देखा नहीं था, फिर भी उनके गुणों और कीर्तियों से प्रभावित होकर वे उनके प्रेम में गहराई से डूब गईं।

जब उनके परिवार ने उनका रिश्ता चेदिराज शिशुपाल से तय किया, तो रुक्मिणी ने मन-ही-मन कृष्ण से विवाह की इच्छा जताई। उन्होंने एक पत्र कृष्ण के नाम भेजा, जिसमें वे उनसे विवाह करने का आग्रह कर रही थीं और अपनी इच्छा व्यक्त की थी।

कृष्ण, जो धर्म और प्रेम के पुजारी थे, उस पत्र पढ़कर तुरंत गतिवान हुए। जब रुक्मिणी का स्वयंवर निकट आया, तो कृष्ण ने निश्चय किया कि वह उन्हें बलपूर्वक ले जाकर विवाह करेंगे। इस प्रकार, उन्होंने रुक्मिणी का हरण कर लिया, लेकिन यह कोई अन्याय नहीं, बल्कि एक धार्मिक और प्रेमपूर्ण कार्य था।

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