तीन मित्र: कृष्ण के सच्चे संगी

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में कई सखाओं का स्थान महत्वपूर्ण है, लेकिन तीन ऐसे मित्र थे जिनका प्रेम उनके प्रति अनन्य था — मधुमंगल, श्रीदामा और सुदामा। ये तीनों बाल्यकाल के सखा थे और वृंदावन की घाटियों में कृष्ण के साथ खेलते, ग्वाल बनकर गायें चराते और यमुना के किनारे समय बिताते थे।

मधुमंगल, श्रीदामा और सुदामा का नाम भक्तिपरंपरा में विशेष स्थान रखता है। सुदामा की कथा तो सभी जानते हैं — गरीबी में रहकर भी उनका कृष्ण के प्रति अटूट विश्वास था। जब वे द्वारका पहुँचे, तो कृष्ण ने उनकी दीनता को पहचानकर उनका हर दुख दूर कर दिया। ऐसा लगता था मानो कृष्ण के लिए ये न सिर्फ सखा, बल्कि आत्मीय आत्मा थे।

श्रीदामा और मधुमंगल भी उसी प्रेम के धनी थे। गुरुकुल में पढ़ाई के दिनों में वे कृष्ण के साथ रहे, उनके साथ रहकर ज्ञान और जीवन की बारीकियाँ सीखी। इन तीनों मित्रों ने कृष्ण को सिर्फ एक दिव्य रूप में नहीं, बल्कि सच्चे दिल के साथ

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