कृष्ण का मोर पंख क्यों है प्रतीक?
भगवान कृष्ण के मुकुट पर मोर के पंख का स्थान बहुत गहरा है। यह सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि एक सार्थक प्रतीक है। मोर भारतीय संस्कृति में पवित्रता, सौंदर्य और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है।
प्राचीन कथाओं में एक रोचक विश्वास है—कि मोरनी मोर के आंसू पीकर गर्भ धारण करती है। हालांकि यह वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं है, लेकिन इस मान्यता का आध्यात्मिक महत्व है। इसे शुद्धता का प्रतीक माना गया है। इसी तरह, कृष्ण भी निष्कलंक, निर्मल और दिव्य प्रेम के प्रतीक हैं।
मोर का पंख उनकी लीलाओं, संगीत और प्रकृति से गहरी जुड़ाव को भी दर्शाता है। वृंदावन की घाटियों में कृष्ण के साथ मोर अक्सर नृत्य करते दिखाई देते हैं। यह पंख उनकी मानवीय लीलाओं और दिव्यता के बीच के संतुलन को भी दर्शाता है।
इस तरह, मोर का पंख सिर्फ एक अलंकरण नहीं—बल्कि कृष्ण के चरित्र की शुद्धता, सौंदर्य और प्रेम का सूचक है।
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