क्यों नहीं होती माता रुक्मिणी की पूजा? जानिए दुर्वासा ऋषि के शाप की कथा
द्वारकाधीश के मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के साथ आमतौर पर कोई सहयोगी देवता नहीं होता। माता रुक्मिणी का नाम लेते ही मन में प्रेम और समर्पण की छवि उभरती है, फिर भी यहां उनकी पूजा नहीं होती। इसके पीछे एक प्राचीन कथा है, जो तपस्वी दुर्वासा ऋषि के शाप से जुड़ी है।
कहा जाता है कि एक बार दुर्वासा ऋषि श्रीकृष्ण के दरबार में आए। उनका आदर-सत्कार करने में थोड़ी देर हो गई, जिससे ऋषि क्रोधित हो उठे। उन्होंने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी को 12 वर्षों तक अलग रहने का शाप दे दियérie। उस समय से यह व्रत लगा रहा कि दोनों की साथ में पूजा नहीं होगी।
इसी कारण द्वारकाधीश मंदिर में भगवान कृष्ण के साथ रुक्मिणी की मूर्ति नहीं स्थापित की गई। हालांकि, रुक्मिणी की अपनी एक महत्वपूर्ण मूर्ति द्वारका के बाहर रुक्मिणी मंदिर में विराजमान है, जहां उनकी विशेष पूजा होती है।
इस कथा के माध्यम स
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