रुक्मिणी: कृष्ण के हृदय की अधिराज्ञी
भगवान कृष्ण के जीवन में कई स्त्रियों का स्थान विशेष था, लेकिन उनके हृदय में सबसे ऊँचा स्थान रुक्मिणी का था। परंपरा के अनुसार, वे कृष्ण की प्रमुख और पसंदीदा पत्नी मानी जाती हैं। उनके प्रति कृष्ण का प्रेम इतना गहरा था कि इसने अक्सर दूसरी पत्नियों, विशेषकर सत्यभामा के मन में ईर्ष्या भर दी।
रुक्मिणी ने कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण से उन्हें अपनी ओर आकर्षित किया था। उनका चरित्र दृढ़ता, सद्भावना और आस्था का प्रतीक रहा। कहा जाता है कि कृष्ण ने रुक्मिणी का चयन स्वयं किया था, जब वे अन्य राजाओं के बीच भी वरण से बच रही थीं। इस घटना के बाद कृष्ण ने उन्हें अपने राजमहल में ले जाकर विवाह किया, जो उनके प्रेम का एक अनमोल प्रतीक बन गया।
हालाँकि कृष्ण की आठ पत्नियाँ थीं, जिन्हें अष्टभार्या कहा जाता है, लेकिन रुक्मिणी हमेशा विशेष स्थान पर रहीं। उनकी भक्ति, सहजता और निष्ठा ने उन्हें कृष्ण के हृदय में एक
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