राधा को वृषभानुजा क्यों कहते हैं?
भगवान कृष्ण की प्रियतमा और प्रेम की देवी मानी जाने वाली राधा को अक्सर वृषभानुजा कहा जाता है। यह नाम उनके पिता के नाम पर पड़ा है। पद्म पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि राधा वृषभानु नामक एक वैष्य गोप की पुत्री थीं। इसलिए उन्हें वृषभानु की लाड़ली संतान कहा जाता है।
वृषभानु की पत्नी का नाम कीर्ति था और राधा उनकी ही आशीर्वाद से जन्मीं। बरसाना, जो आज भी भक्तों के लिए एक पवित्र स्थान है, वहीं वृषभानु का निवास था। राधा का प्रारंभिक नाम 'वृषभानुकुमारी' था, जो उनके पितृस्थान को दर्शाता है।
वृषभानुजा यानी वृषभानु की पुत्री — यह शब्द न सिर्फ एक पहचान है, बल्कि भक्ति में उनके स्थान को भी दर्शाता है। राधा का जन्म एक साधारण गोपकन्या के रूप में हुआ था, लेकिन उनका प्रेम कृष्ण के प्रति इतना उदात्त और निस्वार्थ था कि वे आज भक्ति की अवधारणा की प्रतिमूर्ति बन चुकी हैं।
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