राधा का द्वारका आगमन: एक अनकही विरह की कहानी

कृष्ण के वृंदावन छोड़ने के बाद, राधा का हृदय टूट गया था। लेकिन वह एक सामान्य नारी नहीं थीं—उनका प्रेम इतना गहरा था कि समय भी उसे न भुला सका। जीवन भर वृंदावन में रहते हुए भी, उनकी आँखें हमेशा कृष्ण की ही ओर उठी रहीं। एक दिन, जब उन्हें लगा कि अब जीवन के कर्तव्य पूरे हो चुके हैं, तो वह चुपचाप वृंदावन छोड़कर निकल पड़ीं।

कई दिनों तक पैरों पर चलकर, वह द्वारका पहुँचीं। यह वही नगरी थी जहाँ कृष्ण राजा के रूप में विराजमान थे। राधा महल तक पहुँचीं, लेकिन द्वारपाल उन्हें रोक देते हैं। एक साधारण गोपी के रूप में, उनका प्रवेश वहाँ मना था। फिर भी, उनकी भक्ति और प्रेम की गहराई ने अंततः कृष्ण का ध्यान खींचा।

कहा जाता है कि कृष्ण ने उन्हें छिपकर देखा और उनके दर्द को समझा। लेकिन राजदरबार के बंधनों में बंधे कृष्ण उनसे सामने आकर मिल नहीं सके। फिर भी, राधा का आगमन द्वारक

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