श्रीकृष्ण की पत्नियाँ: आस्था और कथा का संगम
भगवान श्रीकृष्ण, जिनकी मूर्ति प्रेम, लीला और धर्म की जीत है, के वृंदावन के बाल गोपाल से लेकर मथुरा-द्वारका के राजकुमार तक के रूप हर युग में प्रिय रहे हैं। कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि कृष्ण जी की पत्नियाँ कितनी थीं?
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण की आठ पत्नियाँ मुख्य थीं—रुक्मणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिन्दी, मित्रविंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा। इनमें रुक्मणी और सत्यभामा विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। रुक्मणी को विष्णु की शक्ति लक्ष्मी का अवतार माना जाता है, जबकि सत्यभामा ने साक्षात भगवान के साथ धरती पर धर्म की स्थापना किया।
लेकिन कथाओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से में कहा जाता है कि असुर नरकासुर ने 16,000 स्त्रियों को बंदी बना लिया था। उनकी लाज बचाने के लिए कृष्ण जी ने उन सभी के साथ विवाह किया, ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जी सकें। यह विवाह धर्म, करुणा और इंसानियत का प्रतीक है।
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