काली माता की उत्पत्ति कैसे हुई?
काली माता को देवी भगवती का ही एक रूप माना जाता है। मान्यता है कि जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विषपान किया, तो उस घोर विष के संपर्क में आकर उनके अंदर एक शक्ति प्रकट हुई। यह शक्ति थी मां काली।
कहा जाता है कि विष के प्रभाव से वह शक्ति काले रंग की हो गई। उनका वेश-भूषा भयंकर था—जीभ लाल, शरीर काला, और गले में मुंडमाला सजी हुई। भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोली, तो इसी शक्ति के रूप में काली माता प्रकट हुईं।
काली माता को विनाश और समय की देवी माना जाता है। वह न केवल राक्षसों का विनाश करती हैं, बल्कि अंधकार, भय और अज्ञानता को भी नष्ट करती हैं। उनका काला रंग समय के अनंत स्वरूप को दर्शाता है।
देवी काली की पूजा बंगाल, असम और भारत के कई हिस्सों में विशेष रूप से दुर्गापूजा और कालीपूजा के दौरान की जाती है। उनके भक्त मानते हैं कि वह अपने भक्तों की हर मुश्किल में रक्षा करती हैं।
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