श्री कृष्ण के वंशज: इतिहास और परंपरा

भगवान श्री कृष्ण के वंशजों के बारे में जानकर इतिहास और पौराणिक कथाओं का एक अनूठा संगम दिखाई देता है। इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, श्री कृष्ण के 181वें वंशज के रूप में करौली के राजपरिवार सहित यदुवंशी जादौन परिवारों को माना जाता है। ये परिवार खुद को यादव वंश का ही हिस्सा मानते हैं, जो श्री कृष्ण के वंश का ही एक हिस्सा है।

पुराणों में वर्णित अनुसार, कृष्ण के पुत्र के वंशज धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में धुंधले होते गए, लेकिन उनके वंश की कुछ शाखाएँ आज तक बरकरार हैं। वज्रनाभ, जो कृष्ण के परपोते के वंशज माने जाते हैं, चंद्रवंश की एक शाखा के संस्थापक के रूप में उभरे। चंद्रवंश, जो भारतीय इतिहास में एक प्रमुख राजवंश है, इसी धागे से जुड़ा हुआ है।

आज भी राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश तक कई राजपरिवार अपनी उत्पत्ति यदुवंश से जोड़ते हैं। करौली के महाराजा आज भी अपने आपको श्री कृष्ण की परंपर

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