पूतना की मृत्यु और उसके पश्चात क्या हुआ?
कंस के डर से पूतना नाम की राक्षसी बालकृष्ण को मारने गोकुल आई थी। उसने स्तन्य देने का भाव बनाकर श्रीकृष्ण के मुँह में विषैले स्तन को डाल दिया। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसका दूध पीते समय ही उसकी जान ले ली। उनके द्वारा पीया गया वह दूध इतना पवित्र हो गया कि पूतना के सारे पाप तुरंत नष्ट हो गए।
जब पूतना भूमि पर गिरी, तो उसका विशाल रूप देखकर ब्रजवासी भयभीत हो गए। लेकिन फिर उन्होंने निर्णय लिया — उस विशाल शरीर को स्वयं न छूने की। उन्होंने कुल्हाड़ियों से उसके शरीर के टुकड़े कर दिए और गोकुल से दूर ले जाकर लकड़ियों पर रखकर जला दिया।
जैसे ही आग लगी, एक अनोखी महक निकलने लगी। ऐसा लग रहा था मानो अगरबत्ती जल रही हो। लोगों ने आश्चर्य से देखा कि पापिन भी भगवान के स्पर्श से पवित्र हो जाती है। इसी से पता चलता है कि श्रीकृष्ण की कृपा इतनी महान थी कि वह अपने शत्रुओं के भी पाप समाप्त कर देत
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