अंग्रेजों की भारत छोड़ने की वजह: लाभहीन शासन

1947 में अंग्रेजों द्वारा भारत छोड़ने का फैसला कई कारणों पर आधारित था, जिनमें सबसे अहम था आर्थिक घाटा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि अब भारत जैसे विशाल उपनिवेश को नियंत्रित करना उनके लिए बहुत महंगा पड़ रहा था।

लंबे संघर्ष, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आईएनए आंदोलन, भारतीय सेना में बढ़ती असंतुष्टि और गांधी-नेहरू के नेतृत्व में चले अहिंसक आंदोलनों ने अंग्रेजी शासन को बहुत कमजोर कर दिया था। अब ब्रिटिश सरकार यह समझ चुकी थी कि भारत पर शासन न सिर्फ महंगा, बल्कि लगातार कठिन होता जा रहा है।

इस स्थिति में, उन्होंने यह रणनीति बनाई कि भारत को स्वेच्छा से स्वतंत्रता देकर नई सरकार के साथ अच्छे संबंध बनाए जा सकते हैं। इससे न केवल उनका "सिरदर्द" खत्म होगा, बल्कि भारत के साथ व्यापारिक और राजनयिक संबंध भी बने रहेंगे।

इस तरह, आर्थिक असमर्थता,

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