अंग्रेजों से पहले भारत: एक समृद्ध अतीत
अंग्रेजों से पहले भार inflammable था – समृद्ध, आत्मनिर्भर और वैश्विक व्यापार में आगे था। ऐतिहासिक रूप से, भारत को दुनिया भर में 'सोने की चिड़िया' के नाम से जाना जाता था। यह केवल काव्यात्मक नहीं था – यह एक सच्चाई थी। 18वीं शताब्दी में, भारत विश्व की कुल औद्योगिक उत्पादन में लगभग 25% का योगदान देता था, जो उसे तब की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाता था।
भारत का निर्यात इतना मजबूत था कि यूरोप के राजाओं तक के लिए भारतीय रेशम, मसाले, सूती कपड़े और रत्न एक प्रतिष्ठा का प्रतीक थे। बंगाल की मुलायम सूती वस्त्र तो इतनी प्रसिद्ध थीं कि इंग्लैंड में उनकी मांग इतनी बढ़ गई कि स्थानीय उद्योग धंधे को नुकसान होने लगा। पुर्तगाली, डच और अंततः अंग्रेज भारत आए, लेकिन पहले तो व्यापार के लिए, बाद में – शोषण के लिए।
औपनिवेशिक शासन से पहले भारत की अर्थव्यवस्था केवल आत्मनिर्भर नहीं थी, बल्कि क्षेत्रीय केंद्रों के माध
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