हनुमान जी का अदम्य बल
हनुमान जी के बल की चर्चा करें तो वह किसी अतिशयोक्ति से कम नहीं है। कहा जाता है कि उनमें सौ हाथियों के बराबर बल था। यह केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि उनकी भक्ति, बुद्धि और साहस का भी प्रतीक है। उनका बल इतना अद्भुत था कि धरती को भी चुनौती देने वाले भीम का अहंकार टूट गया।
श्री कृष्ण ने भीम के अहंकार को तोड़ने के लिए हनुमान जी को भेजा।एक बार, भीम अपनी ताकत पर इतना घमंड कर रहे थे कि उन्हें लगा कि कोई भी उनसे ताकत में बड़ा नहीं हो सकता। तब श्री कृष्ण ने मुस्कुराते हुए हनुमान जी को बुलाया। जब भीम ने हनुमान जी को देखा, तो उन्हें एक छोटे से बूढ़े वानर के रूप में देखकर उपेक्षा कर दी। लेकिन जब भीम ने उनकी पूंछ से बैठने की कोशिश की, तो वह हिल भी नहीं सके। हनुमान जी ने अपनी पूंछ हल्के से उठाई और भीम उछलकर दूर जा गिरे।
उस पल भीम को एहसास हुआ कि बल केवल मांस-पेशियों में नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मसमर्पण में भी होता ह
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