स्टॉक ट्रेडिंग में निपटान: T+2 समयसीमा क्यों मायने रखती है?

जब आप किसी स्टॉक को खरीदते या बेचते हैं, तो लेन-देन तुरंत पूरा नहीं हो जाता। एक ट्रेड के सेटल होने में आमतौर पर दो कार्यदिवस का समय लगता है। इसे T+2 के रूप में जाना जाता है — यानी व्यापार की तारीख के बाद दो दिन।

उदाहरण के लिए, अगर आप सोमवार को कोई स्टॉक खरीदते है0, तो वह लेन-देन बुधवार को सेटल होगा। इस दौरान ब्रोकरेज फर्म और क्लीयरिंग हाउस पैसे और स्टॉक के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को अंतिम रूप देते हैं।

यह समयसीमा निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तब तक तकनीकी रूप से आपके पोर्टफोलियो में स्टॉक नहीं जुड़ता, न ही बिक्री के बाद पैसा पूरी तरह से उपलब्ध होता है।

भारत में भी यही T+2 नियम लागू होता है, जिसे सेबी द्वारा निर्धारित किया गया है। इससे बाजार में तेजी और पारदर्शिता बनी रहती है।

याद रखें, सप्ताहांत या सरकारी छुट्टियाँ इस समयसीमा को प्रभावित कर सकती है

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