यदि शिक्षक न होते तो क्या होता?

कल्पना कीजिए, एक ऐसा संसार जहाँ शिक्षक न हों। क्या हमारे बच्चे पढ़ सकते? क्या हम सही और गलत में फर्क कर पाते? शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाले नहीं होते, वे जीवन के मूल्य सिखाते हैं। उनके बिना समाज अनुशासनहीनता के गर्त में फंस जाता।

वे हमें बस पाठ नहीं पढ़ाते, बल्कि इंसान बनाने का काम करते हैं। सत्य, करुणा, क्षमा, त्याग—ये सब गुण शिक्षकों के माध्यम से ही समाज में फैलते हैं। वे न केवल ज्ञान देते हैं, बल्कि उस ज्ञान को सही दिशा देते हैं।

एक सेवाभावी शिक्षक ही वह व्यक्ति है जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करता है। ऐसे लोग समाज की नींव होते हैं। वे न केवल छात्रों को, बल्कि पूरे राष्ट्र को आगे बढ़ाते हैं।

उस दिन, 20 जून 2022 को, जब यह बात सामने आई, तो यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षक के बिना समाज का अस्तित्व ही कल्पना से परे है। वे वास्तव में राष्ट्र निर्माता हैं।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय