एक शिक्षक के जिम्मे सिर्फ 4-5 बच्चे: स्कूलों में असंतुलन की तस्वीर
शिक्षा के क्षेत्र में एक बात अक्सर चर्चा में रहती है—एक शिक्षक कितने बच्चों को सही ढंग से पढ़ा सकता है? औपचारिक नियमों के मुताबिक, हर 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। लेकिन जब हम ताजा हकीकत की बात करते हैं, तो तस्वीर कुछ अलग है।
भास्कर की पड़ताल में पता चला कि कई स्कूलों में एक शिक्षक के कंधों पर सौ से ज़्यादा बच्चों की ज़िम्मेदारी है। दूसरी ओर, कुछ स्कूलों में तो हालात इतने उलटे हैं कि एक शिक्षक के नाम पर सिर्फ 4-5 बच्चे ही पढ़ रहे हैं।
यह असंतुलन सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है। यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार की बात है। जहां एक शिक्षक को सैकड़ों बच्चों को संभालना पड़ता है, वहां बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान नहीं मिल पाता। वहीं, जहां बच्चों की संख्या कम है, शिक्षक अक्सर अतिरिक्त उत्तरदायित्वों से जूझते हैं या फिर संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पाता।
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