बच्चों के विकास में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका

बच्चे सिर्फ किताबों से या शिक्षक के भाषण से नहीं सीखते। वे अपने आसपास की दुनिया को अनुभव कर, छूकर, गलतियाँ करके और सवाल पूछकर ज्ञान का निर्माण स्वयं करते हैं। इस प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका एक मार्गदर्शक और सुगमकर्ता की होती है। वह बच्चे के सामने ज्ञान का ढेर नहीं लादता, बल्कि उसकी जिज्ञासा को पहचानता है और उसे सोचने के लिए प्रेरित करता है।

यह विचार संरचनावाद (constructivism) पर आधारित है, जो मानता है कि बच्चा ज्ञान को अपने तरीके से समझकर बनाता है। एक अच्छा शिक्षक इस बात को भलीभांति समझता है कि हर बच्चा अलग है – उसकी सोचने की शैली, गति और रुचि भी अलग हो सकती है। इसलिए वह बच्चे के स्तर पर उतरकर उसके साथ जुड़ता है, उसकी बात सुनता है और उसकी सीखने की प्रक्रिया को सहज बनाता है।

इसके लिए शिक्षक में गहन संवेदनशीलता होनी चाहिए। वह न केवल पाठ्यक्रम पढ़ाए, बल्कि बच्चे के भावनात्मक और सामाजिक विक

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