भारत की पहली महिला शिक्षिका: सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षिका माना जाता है। उन्होंने 19वीं शताब्दी में एक ऐसा काम किया, जो उस समय के सामाजिक ढांचे के खिलाफ था। जब लड़कियों को पढ़ना-लिखना भी पाप माना जाता था, तब सावित्रीबाई ने बालिका शिक्षा के लिए आवाज उठाई।
उनका जन्म 1831 में महाराष्ट्र में हुआ था। सिर्फ 9 साल की उम्र में शादी के बाद भी, उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 1848 में पुणे में भारत का पहला बालिका स्कूल खोला। यह एक ऐतिहासिक कदम था, क्योंकि उस समय छुआछूत और लैंगिक भेदभाव इतना गहरा था कि लड़कियों को स्कूल तक जाने की इजाजत नहीं थी।
सावित्रीबाई ने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं सिखाई, बल्कि निर्धन और दलित बच्चियों के लिए स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी बनाया। वे स्वयं स्कूल जाने वाली छात्राओं के लिए मशाल जैसा काम करती थीं — अंधकार में रोशनी लेकर आने वाली महिला।
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