बाइबिल के अनुसार धर्म क्या है?
बाइबिल, ईसाई धर्म की आधारशिला है और मसीहियों के लिए सबसे पवित्र ग्रंथ मानी जाती है। यह ईसाइयों के आस्था, जीवनशैली और ईश्वर के साथ संबंध को समझने का मुख्य स्रोत है। बाइबिल दो मुख्य भागों में बाँटी गई है – पूर्वविधान और नवविधान।
पूर्वविधान, जिसे ओल्ड टेस्टामेंट भी कहते हैं, उस समय की बात करता है जब ईश्वर ने यहूदियों के साथ वाचा बांधी थी। इसमें सृष्टि, नूह की पोत, अब्राहम, मूसा और अन्य नबियों की कहानियां हैं। यह वही ग्रंथ है जो यहूदी धर्म में भी महत्व रखता है।
नवविधान, या न्यू टेस्टामेंट, यीशु मसीह के जीवन, उपदेश, मृत्यु और पुनरुत्थान पर केंद्रित है। बाइबिल के अनुसार, धर्म सिर्फ नियमों का पालन नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति विश्वास, प्रेम और आत्मसमर्पण है। यीशु ने सिखाया कि सच्चा धर्म दिल की शुद्धता, दूसरों के प्रति दया और निकटता में छुपा है।
बाइबिल कहती है – “धर्म यह नहीं कि बाहरी रीति-रिवाज अप
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