भगवान कहाँ मिलेंगे?
बहुत से लोग मंदिर जाते हैं, मूर्तियों के सामने घंटी बजाते हैं और सोचते हैं कि अब भगवान मिल गए। लेकिन सच तो यह है कि भगवान कहीं बाहर नहीं, बल्कि हर जगह हैं। वे न तो केवल मंदिर में बसते हैं, न ही किसी एक रूप में बंद हैं।
भगवान का कोई एक रूप नहीं है। वे उस पेड़ में हैं, जो धूप में छाया दे रहा है। वे उस नदी में हैं, जो बिना कुछ मांगे बह रही है। वे उस चिड़िया में हैं, जो सुबह के समय गीत गा रही है। हर जीव, हर पत्ती, हर सांस में भगवान का निवास है।
कभी-कभी हम आसमान की ओर देखकर पूछते हैं – "भगवान कहाँ हैं?" लेकिन जवाब तो हमारे भीतर ही छिपा है। जब दिल में शांति आती है, जब आंखों में आंसू आ जाते हैं बिना किसी दर्द के, तब समझ लीजिए – भगवान मिल गए।
इसलिए भगवान को ढूंढने के लिए दूर न जाएं। बस एक बार चुप हो जाएं। अपने भीतर झांकें। वहीं, इसी पल में, आपके सबसे निकट, भगवान मौजूद हैं। क्योंकि जहां भी जीवन
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