महाभारत के पहले राजा: राजा कुरु
महाभारत के महाकाव्य में जहां युद्ध, धर्म और परिवार की कथा प्रमुख है, वहीं इसकी जड़ें उन राजवंशों में छिपी हैं जो सदियों से चले। इन्हीं में से एक है कुरु वंश, जिसकी शुरुआत मानी जाती है राजा कुरु से।
वैसे तो महाभारत का मुख्य कथानक भीष्म, युधिष्ठिर, अर्जुन और दुर्योधन जैसे पात्रों के इर्द-गिर्द घूमता है, लेकिन उससे भी पहले की बात है राजा कुरु की। वे उन वंश के प्रथम और संस्थापक पुरुष थे, जिनके नाम पर ही 'कुरुवंश' और कुरुक्षेत्र का नामकरण हुआ।
पुराणों और इतिहास के अनुसार, राजा कुरु अत्यंत बलशाली, तेजस्वी और धर्मात्मा थे। उन्होंने अपने समर्पण और तपस्या से एक ऐसा वंश खड़ा किया, जो सदियों तक भारत के इतिहास में चमकता रहा। कहते हैं, उन्होंने अपने नाम के अनुरूप ही कर्म किया — कुरुते इति कुरु, यानी जो करता है, वह कुरु।
आज भी कुरुक्षेत्र की धरती उनकी वीरता की गाथाएं सुनाती है। महाभारत का युद्ध
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