भारत में सच्ची ताकत किसके पास है?
भारत में ताकत किसके पास है, यह सवाल अक्सर चर्चा का विषय बना रहता है। कई लोग सोचते हैं कि प्रधानमंत्री सबसे ज्यादा प्रभावशाली होते हैं, लेकिन संविधान की दृष्टि से देखें तो वास्तविक ताकत की जड़ राष्ट्रपति में छिपी है।
अनुच्छेद 60 के अनुसार, राष्ट्रपि संविधान के प्रमुख रक्षक हैं। यह सिर्फ एक औपचारिक भूमिका नहीं है। जब कार्यपालिका या विधायिका के फैसलों पर संवैधानिकता का संकट आता है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसे मामलों में पूर्व-खाली शक्ति होती है। यानी वे अपनी आप में चेतावनी दे सकते हैं, संशोधन की मांग कर सकते हैं या अनुचित कदमों को रोक सकते हैं।
हालांकि राष्ट्रपति दैनिक नीतिगत फैसलों में सक्रिय नहीं होते, लेकिन वे राष्ट्र के संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा का अंतिम कवच हैं। जैसे, अगर कोई कानून संविधान के खंडन की सीमा पार करता है, तो राष्ट्रपति उसे वापस भेजकर पुनर्विचार का मौका दे सकते हैं।
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