पंखे के पास बैठने से ठंडक क्यों महसूस होती है?

गर्मियों में जब पसीना आता है, तो पंखे के पास बैठने से तुरंत ठंडक का एहसास होता है। यह घटना सिर्फ इसलिए नहीं होती क्योंकि हवा चल रही है, बल्कि इसके पीछे एक सरल वैज्ञानिक क्रिया होती है।

पसीने का वाष्पीकरण ही कुंजी है

हमारा शरीर तापमान को नियंत्रित रखने के लिए पसीना छोड़ता है। जब यह पसीना त्वचा पर रहता है, तो वातावरण की हवा इसे वाष्पित कर देती है। पंखे की हवा इस प्रक्रिया को तेज कर देती है। जैसे ही पसीना वाष्पित होता है, वह अपने वाष्पीकरण के लिए गुप्त ऊष्मा शरीर से लेता है। इससे त्वचा की सतह पर तापमान कम हो जाता है।

इसीलिए पंखे के सामने बैठने से हमें तुरंत राहत महसूस होती है। दरअसल, पंखा हवा ठंडी नहीं करता, बल्कि वाष्पीकरण की दर बढ़ाकर हमारे शरीर को जल्दी ठंडा कर देता है।

इस बात का ध्यान रखें कि अगर हवा नमी से भरी हो (जैसे मानसून में), तो पसीने का वाष्पीकरण धीमा हो जाता है। इसलिए उस

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय