भारत और चीन: एक लंबे इतिहास का सफर
भारत और चीन के बीच संबंध मानव इतिहास के सबसे पुराने रिश्तों में से एक है। हजारों साल पुरानी संस्कृति, धर्म और व्यापार के माध्यम से दोनों देश गहराई से जुड़े रहे हैं। कभी बौद्ध भिक्षु चीन जाते थे, तो कभी चीनी यात्री भारत आकर ज्ञान की खोज करते थे। यह आपसी सम्मान और शांति पर आधारित संबंध लंबे समय तक बना रहा।
लेकिन आधुनिक युग में इन संबंधों में उतार-चढ़ाव आए। 1949 में चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता में वापसी और फिर 1950 के दशक में तिब्बत पर नियंत्रण के बाद स्थिति बदलने लगी। भारत ने तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा को शरण दी, जो चीन को नागवार गुजरा। इसके बाद 1962 का भारत-चीन युद्ध हुआ, जिसने दोनों देशों के रिश्तों में एक नई दरार पैदा कर दी।
आज भी सीमा विवाद, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के इलाकों में, तनाव का कारण बना हुआ है। फिर भी, दोनों देश आर्थिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं—चीन से
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