ईश्वर कहाँ है? मनुष्य का मन कहाँ रहता है?
हम अक्सर सोचते हैं कि ईश्वर कहाँ है—क्या वह मंदिर में है, मस्जिद में, मक्का-मदीना में, या फिर कैलाश पर्वत जैसे पवित्र स्थानों पर? मनुष्य इन सबके पीछे भागता रहता है, क्योंकि उसका मन सदैव किसी बड़े आध्यात्मिक सत्य की खोज में रहता है।
लेकिन क्या ईश्वर सच में बाहर कहीं है?जब इंसान घूम-घूमकर पूजा-पाठ, तीर्थयात्रा और क्रिया-कर्म करता है, तब भी उसके मन का शांत नहीं होता। कई लोग तो संन्यास लेकर जंगल में चले जाते हैं, फिर भी उनका मन शांति नहीं पाता। क्यों? क्योंकि वास्तविकता यह है कि ईश्वर ना तो मंदिर में छिपा है, ना ही कैलाश पर।
ईश्वर तो उस मनुष्य के हृदय में बसता है, जो सच्चे मन से उसे ढूंढता है। जब व्यक्ति अपने अंदर झांकता है, अपने विचारों को शुद्ध करता है, तभी वह उस सत्य को पाता है।
मनुष्य का मन ना तो मंदिर में रहता है, ना मस्जिद में। वह तो हर पल उस तलाश में रहता है—जहाँ उसे शांति, प्रेम और स
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