मनुष्य का दूसरा रूप: सूक्ष्म शरीर
गरुड़ पुराण के अनुसार, मनुष्य का शरीर केवल एक नहीं, बल्कि दो रूपों में मौजूद होता है। एक है व्यवहारिक शरीर और दूसरा परमार्थिक शरीर। व्यवहारिक शरीर वह है जिसे हम आँखों से देख सकते हैं—जिसके हाथ-पैर, चेहरा और आकृति होती है। यही हमारा स्थूल शरीर है, जो जन्म और मृत्यु के बीच भौतिक दुनिया में काम करता है।
लेकिन इसके अलावा एक सूक्ष्म शरीर भी होता है, जिसे परमार्थिक शरीर कहा जाता है। यह दिखाई नहीं देता, लेकिन इतना स्पष्ट होता है कि यह स्थूल शरीर की ही तरह दिखता है। यही शरीर मृत्यु के बाद भी आगे की यात्रा करता है। कई पुराणों में इसी सूक्ष्म शरीर को पितृलोक या दूसरी आध्यात्मिक योनियों में जाते हुए बताया गया है।
इस विचार के पीछे यह समझ है कि मनुष्य केवल शारीरिक अस्तित्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का भी घर है। सूक्ष्म शरीर वास्तव में आत्मा का साथी होता है, जो कर्मों के अ
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