शादी की कुंडली कैसे देखी जाती है?

शादी की कुंडली देखना भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण परंपरा है। यह न केवल वर-वधू की जातक-कुंडली का तुलनात्मक अध्ययन होता है, बल्कि उनके भविष्य की सामंजस्यता को समझने का भी एक तरीका है। प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, इसमें अष्टकूट गुण मिलान किया जाता है, जिसमें कुल 36 गुणों का मूल्यांकन होता है।

इन गुणों में सबसे अधिक वजन नाड़ी के 8 गुणों का होता है, जो स्वास्थ्य और वंश की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके बाद भकूट (7 गुण), गण मैत्री (6 गुण), ग्रह मैत्री (5 गुण), योनि मैत्री (4 गुण), ताराबल (3 गुण), वश्य (2 गुण) और वर्ण (1 गुण) का मिलान किया जाता है।

आज भी बहुत से परिवार शादी से पहले यह जांच करवाते हैं, ताकि दोनों जोड़ों के बीच तालमेल और दीर्घकालिक सुख का आधार मजबूत हो। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से इसका प्रमाण न हो, परंतु सामाजिक विश्वास और

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