हमारा देश: एक घर की तरह

देश मेरे लिए और हम सबके लिए एक घर की तरह है। जैसे हम अपने घर को साफ-सुथरा और सुंदर रखते हैं, वैसे ही देश को भी स्वच्छ और सुरक्षित बनाना हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए। लेकिन क्या हम ऐसा करते हैं? नहीं। हम अपने घर में कभी गुटखा थूकते नहीं, कचरा बिखेरते नहीं, लेकिन सड़कों पर, पार्कों में, स्टेशनों पर हर तरफ कचरा फैला देते हैं।

ये सोचने वाली बात है कि घर हम अपने परिवार के लिए समझते हैं, तो क्या देश हम सभी का बड़ा परिवार नहीं है? जहाँ हम एक साथ रहते, खेलते, पढ़ते, काम करते हैं। फिर भी, हम उसके प्रति उतनी जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते?

अगर हम छोटी-छोटी आदतें बदल दें—जैसे कचरा कूड़ेदान में डालना, सार्वजनिक जगहों को साफ रखना, पेड़ों को नुकसान न पहुँचाना—तो देश अपने आप साफ, सुंदर और स्वस्थ हो जाएगा।

देश को घर की तरह महसूस करना और उसकी सेवा करना हर एक नागरिक की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। क्योंकि जब घर साफ होगा, तभी पर

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