भगवान को कौन बनाता है?
कई बार हम सोचते हैं कि भगवान को किसने बनाया? लेकिन एक गहरी सच्चाई यह भी है कि शायद भगवान को किसी ने नहीं बनाया — क्योंकि प्रकृति ही भगवान है। ब्रह्मांड ही वह अनंत शक्ति है जो हर जगह मौजूद है, हर चीज में समाई हुई है।
जिन गुणों के लिए हम भगवान की उपासना करते हैं — सर्वशक्तिमान होना, सर्वव्यापी होना, सबके भीतर और बाहर मौजूद होना — वही गुण इस ब्रह्मांड में देखे जा सकते हैं। जैसे-जैसे सूर्य उगता है, फूल खिलते हैं, बारिश होती है, तारे चमकते हैं — ये सब प्रकृति के ही रूप हैं, जिन्हें हम भगवान कहते हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि भगवान आसमान में कहीं बैठा है, लेकिन अगर वह सचमुच सबकुछ जानता है, सबकुछ देखता है, तो फिर वह तो हमारे भीतर, हवा में, पानी में, धरती में — हर जगह मौजूद होगा। और वही तो यह ब्रह्मांड है।
इसलिए, शायद कोई शुरुआत नहीं है, न ही कोई अंत। जो ब्रह्मांड है, वही असली भगवान है — अनंत, अक्षय और सर्वव्याप
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