ईसा मसीह किस भाषा में बोलते थे?
ईसा मसीह की भाषा के बारे में सदियों से चर्चा होती रही है। ऐतिहासिक और धार्मिक साक्ष्यों के आधार पर, अधिकांश विद्वान मानते हैं कि उनकी दैनिक बोलचाल की भाषा अरामीक थी। यह वह भाषा थी जिसमें गलील के क्षेत्र के लोग उस समय बातचीत करते थे, जहाँ ईसा ने अपना जीवन बिताया।
हालांकि हिब्रू पवित्र ग्रंथों और धार्मिक शिक्षाओं की भाषा थी, लेकिन सामान्य लोगों के बीच अरामीक ही प्रचलित थी। बाइबल में कई स्थानों पर ऐसे शब्द आते हैं जो स्पष्ट रूप से अरामीक मूल के हैं, जैसे “तलिता कुम” (उठ, लड़की!) और “एलोई, एलोई, लामा शबक्तानी” (हे मेरे परमेश्वर, मेरी ओर क्यों तुमने मुख मोड़ लिया?)। ये उद्धरण इस बात के सबूत हैं कि ईसा अपने संदेश अरामीक में ही देते थे।
यहूदी समाज में हिब्रू धार्मिक ज्ञान के लिए सुरक्षित थी, लेकिन आम जनता के साथ संवाद करने के लिए अरामीक का उपयोग स्वाभाविक था। इसीलिए, ईसा के उपदेश, कहानियाँ और चमत्कारों
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