खतना: एक धार्मिक परंपरा या सांस्कृतिक रीति?
खतना, यानी नर्म त्वचा का हटाना, इस्लामिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लेकिन यह दिलचस्प बात है कि कुरान में खतने का कहीं भी सीधा उल्लेख नहीं मिलता। इसके बजाय, इसका समर्थन कुछ हदीस और पैगंबर मुहम्मद की सुन्नत (अभ्यास) से किया जाता है।
ऐतिहासिक रूप से देखें तो खतना इस्लाम से पहले भी अरब जनजातियों में प्रचलित था। वे इसे शारीरिक शुद्धता और सामाजिक पहचान के तौर पर मानते थे। इस्लाम ने इस प्रथा को धार्मिक महत्व दिया, लेकिन इसकी जड़ें साफ तौर पर सांस्कृतिक रही हैं।
हालांकि आज यह आम तौर पर पुरुषों के साथ जुड़ी बात है, लेकिन इतिहास के कुछ हिस्सों में महिलाओं के खतने की भी प्रथा थी। आधुनिक समय में यह बहुत विवादास्पद रही है और इस्लाम के अधिकांश स्कूल इसे नामंजूर कर चुके हैं।
खतने के पीछे तर्क आज भी दो तरह के हैं – धार्मिक शुद्धता और स्वास्थ्य लाभ। लेकिन यह भी सच है कि यह प्रथा अपन
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