भगवद्गीता के अनुसार भगवान कौन हैं?
भगवद्गीता में भगवान की पहचान स्पष्ट है। श्रीकृष्ण स्वयं अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं कि वे सभी के आदि कारण हैं, सबके स्वामी और सत्य के अंतिम रूप हैं। गीता के प्रत्येक अध्याय में श्रीकृष्ण की दिव्यता का वर्णन है।
ईश्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानन्द विग्रहः — यह वाक्य इस बात की पुष्टि करता है कि परम सत्य श्रीकृष्ण ही हैं। वे न केवल एक महान योद्धा या राजकुमार हैं, बल्कि स्वयं भगवान के पूर्ण रूप हैं। उनका विग्रह सच्चिदानंद, यानी सत्य, चेतना और आनंद का साकार रूप है।
गीता में कृष्ण ने स्पष्ट किया कि वे सृष्टि के आदि स्रोत हैं। न केवल इस युग में, बल्कि समस्त जगत के प्रति वे ही परम पूज्य हैं। जब अर्जुन को संदेह हुआ, तो श्रीकृष्ण ने विश्वरूप दिखाकर यह साबित कर दिया कि वे समस्त ब्रह्मांड के अधिपति हैं।
इसलिए, भगवद्गीता के अनुसार भगवान का साक्षात रूप श्रीकृष्ण हैं। वे न केवल धर्म के संस्थापक हैं, बल्कि जी
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