जीवन के अंतिम पलों में क्या होता है?
जीवन के अंतिम पल बहुत नाजुक होते हैं। शरीर का रासायनिक संतुलन बदलना शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे अंग काम करना कम कर देते हैं। कई बार मरने वाला व्यक्ति बेहोशी की अवस्था में चला जाता है—यह आमतौर पर मृत्यु से कुछ घंटों या दिनों पहले होता है।
इस दौरान सांस लेने का तरीका भी बदल जाता है। सांसें अनियमित हो जाती हैं, कभी तेज़, कभी बहुत धीमी। कई बार श्वास के साथ खराश या घरघराहट जैसी आवाज़ भी आती है, जो प्रियजनों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। लेकिन यह प्रकृति की ओर से एक सामान्य प्रक्रिया है।
इन पलों में व्यक्ति दुनिया से अलग होने लगता है—न तो वह भूख महसूस करता है, न प्यास। उसकी आवाज़, प्रतिक्रिया या नज़र भी धीमी पड़ जाती है। फिर भी, यह माना जाता है कि व्यक्ति तक प्यार और सुकून की भावनाएं पहुंच सकती हैं, भले ही वह बोल न सके।
अंतिम समय में प्रियजनों का साथ, प्रार्थना या पसंदीदा गाने बजाना कई बार शांत
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