आत्मा क्या है? क्या यह शरीर से अलग होती है?

आत्मा के बारे में सोचना हर इंसान के मन में एक बार ज़रूर आता है। हम सभी शरीर के रूप में दिखाई देते हैं, लेकिन क्या हम सिर्फ यही हैं? क्या उस चेतना के पीछे कोई और चीज़ है जो हमें जीवित, सोचते-समझते हुए इंसान बनाती है? आत्मा को अक्सर मन या स्वयं के समान माना गया है। यह वह अमूर्त पहलू है जो हमें व्यक्तिगत बनाता है।

धर्म और दर्शन दोनों में आत्मा को शरीर से अलग माना गया है। शरीर तो मिट्टी का बना है, एक दिन टूट जाएगा, लेकिन आत्मा को अविनाशी माना जाता है। यह वह चेतना है जो व्यक्ति को उसकी भावनाओं, संस्कारों और विचारों के साथ पहचान देती है। कई धर्मों में तो आत्मा को पुनर्जन्म का कारण माना जाता है।

कुछ दार्शनिक मानते हैं कि आत्मा वही है जो सोचता है, महसूस करता है और फैसले लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से इसे मन या चेतना कहा जा सकता है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह कुछ गहरा है—एक

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