परिहार राजपूतों की कुलदेवी – चामुण्डा माता
भारतीय संस्कृति में कई परिवार और जाति समूह अपनी कुलदेवी या कुलदेवता के प्रति गहरी आस्था रखते है, जिनकी पूजा पीढ़ियों से चली आ रही होती है। इसी परंपरा के अनुसार, परिहार राजपूतों की कुलदेवी माँ चामुण्डा को माना जाता है।
बहुत वर्ष पूर्व, जोधपुर के इलाके में परिहार राजपूतों का राज था। ये राजपूत अपनी वीरता और साहस के लिए जाने जाते थे। उनके अस्तित्व के साथ-साथ उनकी आस्था भी लंबे समय तक बनी रही। उनकी कुलदेवी चामुण्डा माता, देवी दुर्गा के ही एक रूप मानी जाती हैं, जो शक्ति और संहार की देवी हैं।
चामुण्डा माता को अक्सर भयानक रूप में चित्रित किया जाता है, लेकिन भक्तों के लिए वे करुणा और रक्षा की प्रतिमा हैं। परिहार वंश के लोग आज भी उनकी पूजा करते हैं और व्रत, उत्सव और मेलों के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं।यह परंपरा सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि पीढ़ियों के इतिहास और संस्क
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