देवी दुर्गा: शक्ति की स्वयं स्फूर्त मूर्ति
हिन्दू धर्म में देवी दुर्गा को सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक माना जाता है। वे केवल एक देवी नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त स्त्री शक्ति की आवाहन हैं। मान्यता है कि जब भी अधर्म का बाहुल्य हुआ, तो देवी ने खुद को प्रकट किया, ताकि धर्म की रक्षा की जा सके।
महिषासुर के वध की कथा इसी शक्ति की गाथा है। एक ऐसा राक्षस, जिसे देवताओं तक ने पराजित नहीं कर पाया, उसका अंत माँ दुर्गा ने अपने दस हाथों में लिए हथियारों से किया। यह केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि अंधकार पर प्रकाश की विजय थी।
उनकी सवारी शेर या बाघ है, जो इस बात का प्रतीक है कि देवी भय पर विजय पाने वाली शक्ति हैं। वे कोमलता भी हैं और क्रोध भी, ममता भी है और तलवार भी। नौ दिनों तक मनाए जाने वाले नवरात्रि में लाखों लोग उनकी आराधना करते हैं।
दुर्गा सिर्फ एक दैवीय रूप नहीं हैं — वे हर घर में माँ के रूप में जीती हैं। उनकी कृपा उन सभी पर बनी
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