मेयार का अर्थ – दया और करुणा की भावना

शब्द "मेयार" का उपयोग मुख्य रूप से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों, खासकर अवधी और बोली संबंधित क्षेत्रों में होता है। यह शब्द संस्कृत के "माया" और हिंदी के "भया" (भाई) से निकला माना जाता है। मेयार का अर्थ होता है – दयालु, कृपालु या वह व्यक्ति जो दूसरों के दुख-दर्द में सहभागी हो।

इस शब्द में एक गहरी मानवीय भावना छिपी है। जब कोई व्यक्ति निःस्वार्थ रूप से दूसरे की मदद करता है, तकलीफ में खड़ा होता है, तो उसे "मेयार" कहा जा सकता है। इसकी स्त्रीलिंग रूप "मेयारी" भी कहीं-कहीं सुनाई देता है, जिसका उपयोग किसी स्त्री के लिए किया जाता है जो दया और प्यार से भरी हो।

आज की तेज दुनिया में, जहाँ लोग अक्सर अपने फायदे में लगे रहते हैं, "मेयार" जैसे शब्द हमें एक सरल, नरम दिल वाले इंसान बनने की याद दिलाते हैं। यह न सिर्फ एक गुण है, बल्कि एक जीवनशैली मानी जा सकती है।

कहते हैं, छोटी-छोटी मदद भी बड़े बदलाव ला सकती

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