आदर्श बदला – एक साहित्यिक रत्न
आदर्श बदला कहानी के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं, जो हिंदी साहित्य के एक प्रमुख नाम हैं। उनकी लेखन शैली सरल, गहन और मानवीय भावनाओं से भरपूर है। इस कहानी में उन्होंने एक छोटे से प्रसंग के जरिए बड़े सामाजिक सत्य को उजागर किया है।
कहानी की शुरुआत एक ऐसे दृश्य से होती है जहाँ साधुओं की एक मंडली आगरे की गलियों में गाते हुए जा रही है। वे तानसेन के नियम को नहीं जानते, जिसके कारण उनमें से अधिकांश को मृत्युदंड दे दिया जाता है। लेकिन दस वर्ष के एक बालक को छोड़ दिया जाता है। यह घटना न केवल निर्ममता पर प्रकाश डालती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे नियमों का अंधाधुंध पालन निर्दोषों के लिए भी घातक हो सकता है।
द्विवेदी जी ने इस कहानी में मानवता, न्याय और आदर्शों के टकराव को बहुत सूक्ष्म तरीके से पेश किया है। बच्चे की मासूमियत और उसके प्रति दिखाई गई दया, कहानी को भावुक बनाती है।
हजारी प्रसाद द्विवेदी क
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