दुर्गा मां का वैदिक एवं पौराणिक स्वरूप
दुर्गा मां के जन्म के संदर्भ में प्राचीन ग्रंथों में विभिन्न दृष्टिकोण मिलते हैं। वेदों में इनका सीधा उल्लेख तो सीमित है, लेकिन उपनिषद में इन्हें उमा हैमवती, अर्थात हिमालय की पुत्री के रूप में वर्णित किया गया है। यही धारणा बाद के पुराणों में आगे बढ़ी है।
पुराणों में दुर्गा को आदिशक्ति का रूप माना गया है — वह प्रारंभिक शक्ति जो सृष्टि, स्थिति और प्रलय के लिए आधार है। वे भगवान शिव की पत्नी हैं, लेकिन साथ ही उनकी पराशक्ति भी हैं। यानी वे केवल शिव की धर्मपत्नी नहीं, बल्कि उस परम तत्व के स्वरूप हैं जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड को धारण करता है।
शास्त्रों में उन्हें प्रधान प्रकृति कहा गया है — वह मूल शक्ति जिससे सारी सृष्टि का निर्माण होता है। उन्हें गुणवती माया भी कहा गया है, जो संसार के मोह में फँसे जीवों को अपनी ओर आकर्षित करती है, लेकिन अंततः उद्धार भी करती है। दुर्गा को बुद्धि-तत
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