भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य
भगवान शिव की तीसरी आंख केवल एक चित्रण नहीं, बल्कि गहरे दार्शनिक अर्थ की वाहक है। जब पार्वती ने उनसे इसका रहस्य पूछा, तो शिव ने बताया कि उनकी दो आंखें तो सृष्टि की रक्षा के लिए हैं, लेकिन तीसरी आंख में विनाश की दिव्य शक्ति निहित है।
यह आंख ज्ञान, तप और अंतिम सत्य का प्रतीक है। यह केवल दिखाई नहीं देती, बल्कि अंदर तक देखने की क्षमता रखती है। जब अधर्म बढ़ता है, जब अहंकार आसमान छूता है, तब शिव इस आंख को खोलते हैं — निर्ममता नहीं, बल्कि पुनर्स्थापना के लिए।
इस ज्योति में इतनी ताकत है कि वह सृष्टि को भी भस्म कर सकती है। लेकिन शिव इसे हमेशा बंद रखते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य विनाश नहीं, संहार के बाद नए जीवन की शुरुआत करना है।
तीसरी आंख हमें यह भी सिखाती है कि सच्चा दर्शन बाहर नहीं, भीतर से आता है। यह आंख अहंकार के अंधकार को जलाकर सत्य का प्रकाश फैलाती है।
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