ब्राह्मणों के देवता कौन हैं?

हिंदू धर्म की परंपरा में ब्राह्मण की स्थिति अत्यंत सम्मानपूर्ण है। प्रश्न के उत्तर में कहा गया है कि “ते मंत्रा: ब्राह्मणाधीना: तस्माद् ब्राह्मण देवता”—अर्थात मंत्र ब्राह्मण के अधीन हैं, देवता मंत्रों के अधीन, और सारा संसार देवताओं के अधीन। इस तर्क के आधार पर ब्राह्मण को स्वयं देवता माना जाता है।

ब्राह्मण को केवल जन्म से नहीं, बल्कि संस्कारों और विद्या से भी पहचाना जाता है। जैसा कि कहा गया है—“जन्मना ब्राह्मणो ज्ञेय: संस्कारैर्द्विज उच्चते। विद्यया याति विप्रत्वं, त्रिभि: श्रोत्रिय लक्षणम्”। यानी जन्म से तो सभी ब्राह्मण हैं, लेकिन संस्कारों से द्विज (दूसरी बार का जन्म) कहलाते हैं, और वेद-विद्या प्राप्त कर वह विप्र (ज्ञानी) बनते हैं।

ब्राह्मणों को देवता इसलिए भी माना जाता है क्योंकि वे यज्ञ, मंत्र और वेद के धारक हैं। वे न केवल अपने लिए, बल्कि समाज के लिए देवताओं तक पहुंचने का माध्यम बनते हैं। प्राचीन काल में ऋ

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