पेड़ ने सब कुछ दिया, फिर भी आदमी क्यों नहीं खुश था?
एक कहानी है, जहाँ एक आदमी पेड़ के साथ बचपन से लेकर बुढ़ापे तक साथ रहता है। पेड़ उसके लिए छाया देता है, फल देता है, उसकी जरूरतों का ध्यान रखता है। जब आदमी बूढ़ा हो जाता है, तो वह लौटकर आता है — थका हुआ, अकेला, और फिर पेड़ से सिर्फ एक छोटी-सी जगह माँगता है जहाँ वह आराम से बैठ सके। पेड़ खुशी-खुशी अपनी डाली काट देता है ताकि आदमी एक झूला बना सके।
लेकिन सवाल उठता है — सब कुछ पाने के बाद भी आदमी खुश क्यों नहीं था?
जवाब सीधा है — क्योंकि उम्र ने उसके सारे सुख छीन लिए थे। उसके दाँत गिर चुके थे, ताकत घट चुकी थी, शरीर ढल चुका था। फल तो मिले, छाया मिली, पर उन्हें स्वाद लेने की शक्ति नहीं थी।
यह कहानी सिर्फ एक पेड़ और आदमी की नहीं, बल्कि हम सभी के जीवन की झलक है। क्या अंत तक सब कुछ मिलने के बाद भी अगर स्वास्थ्य न हो, तो खुशी कहाँ?
जीवन के सच्चे सुख तब ही महसूस होते हैं, ज
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।