मां की संपत्ति में बेटी का अधिकार: कानूनी दृष्टिकोण
आज के समय में भी कई परिवारों में यह सवाल उठता है कि क्या बेटी को मां की संपत्ति में समान अधिकार है? जवाब है – हां, पूरी तरह से हां.
भारतीय विधि के अनुसार, बेटी को माता-पिता की संपत्ति पर भाई के बराबर का अधिकार है। यह नियम न तो पिता की संपत्ति तक सीमित है और न ही मां की। चाहे संपत्ति मां के नाम हो या पिता के, बेटी का हक उतना ही मजबूत है जितना किसी भी पुत्र का।
यह अधिकार केवल सैद्धांतिक नहीं है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2020 में एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि बेटी का जन्म के समय से ही परिवार की संयुक्त संपत्ति में हक होता है, चाहे उसका विवाह पहले हुआ हो या बाद में।
इसके अलावा, अगर कोई विवाहित बेटी विधवा हो, तलाक के बाद अकेले रह रही हो, या उसके पति ने उसे छोड़ दिया हो, तो वह अपने माता-पिता के घर रहने का अधिकार मांग सकती है। यह न केवल नैतिक जिम्मेदारी है, बल्कि कानून द्वारा संरक्षित अधिकार
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