महात्मा गांधी का अंतिम आंदोलन: कलकत्ता का ऐतिहासिक उपवास
13 जनवरी, 1948 को कलकत्ता में महात्मा गांधी ने अपना अंतिम आमरण अनशन शुरू किया। यह आंदोलन भारत के बंटवारे के बाद के तनावपूर्ण समय में आयोजित किया गया था, जब हिंसा और सांप्रदायिक दंगों ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया था। गांधी का मंत्र था – अहिंसा और भाईचारा। वे चाहते थे कि हिंसा रुके और शरणार्थी, खासकर मुस्लिम समुदाय के लोग, जो डर के कारण अपने घरों से भाग गए थे, वापस अपने घरों में लौटें।
इस उपवास का उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय सद्भाव बहाल करना था। गांधी जानते थे कि भूख हड़ताल एक आध्यात्मिक शक्ति थी, जो दिल बदल सकती है। उनके आह्वान पर कलकत्ता के हिंदू, मुसलमान, सिख और अन्य सभी समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर शांति की शपथ ली।
महज पांच दिनों में, 18 जनवरी को, जब नेताओं और समुदाय नेताओं ने शांति की गारंटी दी, तो गांधी ने अपना उपवास समाप्त किया।
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