भारत का पहला राष्ट्रीय झंडा: एक ऐतिहासिक यात्रा
भारत के स्वतंत्रता संग्राम की यात्रा में राष्ट्रीय झंडा हमेशा से गर्व और एकता का प्रतीक रहा है। आज जिस तिरंगे को हम राष्ट्रध्वज के रूप में जानते हैं, उसके पहले भी देश का एक अलग झंडा था। 1906 में भारत का पहला प्रस्तावित राष्ट्रीय झंडा सामने आया, जिसे 7 अगस्त, 1906 को कलकत्ता के पारसी बागान चौक (आज ग्रीन पार्क, कोलकाता) में फहराया गया था।
यह झंडा तीन पट्टियों वाला था—ऊपर हरा, बीच में पीला और नीचे लाल। हरी पट्टी पर आठ सफेद कमल के फूल बने थे, जो भारत के आठ प्रांतों का प्रतीक थे। कमल धर्म, शुद्धता और राष्ट्रीय गौरव का भी द्योतक था। इस झंडे को बंगाल में स्वदेशी आंदोलन के दौरान अपनाया गया था, जो अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ प्रतिरोध की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति थी।
इसके बाद कई वर्षों तक झंडे के डिजाइन में बदलाव आए। 1921 में महात्मा गांधी ने एक नए झंडे की रूपरेखा दी, जो आगे चलकर 1931 में आधिकारिक
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