भारत में लड़कियों की संख्या क्यों कम है?
भारत में लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या अधिक होने की वजह सिर्फ जन्मदर नहीं, बल्कि गहरी सांस्कृतिक मान्यताओं का नतीजा है। आज भी कई हिस्सों में लड़के को "परिवार का उज्ज्वल भविष्य" माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि लड़का पिता के नाम को आगे बढ़ाएगा, घर की जिम्मेदारी संभालेगा और बुढ़ापे में माता-पिता की देखभाल करेगा।
लड़की को अक्सर 'अनचाहा बोझ' समझा जाता है, क्योंकि उसकी शादी में दहेज देना पड़ता है और वह शादी के बाद अपने ससुराल चली जाती है। यही सोच गर्भ में लड़की के भ्रूण को जानबूझकर समाप्त करने के पीछे भी है। हालांकि कानून इस पर रोक लगाता है, लेकिन अभी भी कई इलाकों में लिंग निर्धारण की गुप्त प्रथा चलती है।
राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि कुछ राज्यों में लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या काफी कम है। यह संतुलन तभी बदलेगा जब समाज लड़कियों को समान अ
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