महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण

महात्मा बुद्ध के जीवन का अंतिम पड़ाव कुशीनारा में हुआ था। जीवन के अंतिम दिनों में बुद्ध काकुत्था नदी पार करके कुशीनारा नामक वन क्षेत्र में पहुँचे, जो आज उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले में स्थित है। वहाँ एक साल वृक्ष के नीचे उन्होंने अपने अंतिम क्षण बिताए।

बौद्ध ग्रंथों के अनुसार, बुद्ध ने अपने अंतिम भोजन के बाद एक गहरे ध्यान में प्रवेश किया और फिर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। महापरिनिर्वाण का अर्थ है – मृत्यु के बाद जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति। यह कोई साधारण मृत्यु नहीं, बल्कि आत्मा की परम शांति की प्राप्ति थी।

उनके परिनिर्वाण के बाद उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया गया और उनकी अस्थियों को विभिन्न स्थानों पर विभाजित कर दिया गया। कई राजाओं ने इन अस्थियों को प्राप्त कर उनके सम्मान में स्तूपों का निर्माण करवाया। कुशीनारा में भी बाद में एक विशाल स्तूप बनाया गया, जो आज भी बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्

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